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आपसी प्रेम स्नेह का मुख्य स्रोत है, "प्रिती भोज "!

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 आपसी प्रेम स्नेह का मुख्य स्रोत है, "प्रिती भोज "!  साहस सलिल , पटना ; हमारे भारतीय संस्कृति सभ्यता एवं रहन सहन व सामाजिक जीवन शैली की यूंही चर्चा नही है पूरे विश्व में,लोग चाहे जितना विरोध करें हमारे सामाजिक अपनत्व जीवन शैली को, पर विरोध करने वाले भी जानते हैं की हमसे वेहतर उनकी सभ्यता नही है! किन्तु उनका आदत सी हो जाती है विरोध करना, सो करते रहते हैं! फिर भी उन्हें मजबूरी बस येन केन प्रकेन् यह करना ही परता है!क्योंकि इससे अच्छा व पढ़िया पुरी कायनात में भारतियों जैसा कोई परमपरा नही है!  तभी तो आज लोग इसे करते है! अगर राजनीतिक विद्वेस्ता को अलग कर दिया जाये तो हमारे भारत में, जितने भी लोग रहते हैं वह आपसी सद्भावना का मिशाल है! चाहें वह किसी धर्म या कॉम के हो वह आपस में घुल मिल कर जीते हैं, और जरूरत पर एक दूसरे के काम आतें हैं! अगर कुछ व्यक्ति विशेष को छोर दें तो!  आज इसी संदर्भ मे हमरें प्रिय सामाजिक कार्यकर्ता व मीडिया मंच के संपादक श्री रमेश चौबे जी अपने निवाश पर एक लघु प्रिती भोज का आयोजन किये कैलेंडर वर्ष 2022 के विदाई समारोह के तौर पर, जिसका मुख्य उद्देश आपसी प...