राम जी के प्राण प्रतिष्ठा की मंगल बेला है । शंकराचार्य जी नही भाग ले रहे थे तो इसपर किसी का ध्यान नही था ।
राम जी के प्राण प्रतिष्ठा की मंगल बेला है । शंकराचार्य जी नही भाग ले रहे थे तो इसपर किसी का ध्यान नही था । लेकिन ब्राह्मणवाद विरोधी पतितो को अपना पाप खुद ही हजम नही हुआ ।उनके सिर चढकर बोलने लगा।और शंकराचार्य की निन्दा शुरू कर दी जिससे राममय चिंतन भक्ति मे बाधा आई ।दिमाग डायवर्ट किया। इस पाप का दण्ड पापियो को अवश्य मिलेगा जो रामानन्द की धार को रोकने की कोशिश किये।अभी कितना सुन्दर भजन सुनते थे ।"हे आर्य पुत्र हे राम भक्त तुम्हे अयोध्या बुला रही है। " शेबरी का भजन ।अब जो भक्ति प्रवाह चल रही थी मन मे जो उल्लास था राम जी अवश्य मूर्ति मे कल्याणमय भाव मे स्थापित होते । लेकिन मेरा दिमाग डायवर्ट हो गया अब ब्रह्म द्रोह, गुरू निन्दा सुनने के पाप से रावण नाश के समय जो प्रलयंकर रूप था राम जी का वही रूप उनका स्थापित होने जा रहे है । बाल रूप स्थापित करने से बाल रूप नही होगा। जरा साधक हो तो आँख मिलाकर देखलेना और फल भी पहले ही बता रहा हूँ ।रामराज्य आता लेकिन अब लंका नगरी उजडने के बाद आएगा । यानि देश मे जितने सनातन द्रोही है उनके दिन भारी होने वाले हैं। राम जी को ...