धर्म को समझ लें पूरा विश्व धार्मिक हो जाय तो सन्मति आ जाएगी ।और फिर पूरी दुनिया एक हो जाएगी। राष्ट्र तो जिले के प्रखण्ड बन जायेंगे ।
धर्म और राष्ट्रीयता। _______________ आलेखक : पंडित प्रभाकर चौबे । राष्ट्रीय संरक्षक सर्वजन समाज पार्टी । प्रदेश अध्यक्ष बिहार अखिल विश्व अखण्ड सनातन सेवा फाउण्डेशन पंजीकृत नीति आयोग भारत सरकार । एवं अन्य दर्जनो दलो संगठनो के शीर्षस्थ पदाधिकारी । _________________________ धर्म वह है जिसको धारण किये बिना मनुष्य का वास्तविक लक्ष्य ,जन्म लेने का उद्देश्य हासिल ही न हो सके । तथा जिसके पालन नही करने पर जीवन प्रवाह की गति कुन्द हो जाय और जीवनरूपी नदी अपने मार्ग मे नही बहकर तटबंधो को तोडकर बहने लगे जिससे जनमानस को दुख पहुचने लगे उस आचरण से। इसलिए धर्म सबके लिए आवश्यक है । धर्म मानवीय व्यवहार है। उसमे परफेक्टनेश लाने के लिए ही साधनाये और उपासनायें हैं । जीवन मे उत्साह और जीवनी शक्ति के संचार के लिए पर्व और त्यौहार हैं । उपासना की अनेक पद्धतियाँ हैं ।जीवन दर्शन भी अनेक हैं । लेकिन धर्म दर्शन एक ही है उसके विपरीत जिनकी मानवता अपने पन्थ तक सीमित हो तथा अन्य मतो पर हमलावर हो वे विधर्मी हैं । बसुधैव कुटुम्बकम् की भावना जिसमे हो वह धार्मिक है। समदर...