भाजपा की सवर्ण विरोधी गलत नीतियां जिससे सवर्णों मे भ्रम पैदा हुआ है। आलेखक ; प्रभाकर चौबे ।
_________________________ सवर्ण, पिछडे ,दलित और मुस्लिम चार वोट बैंक हैं । सवर्णो की जनसंख्या को सदैव कम बताई गई है ।आप किसी भी सौ मुहल्ले को लेकर सर्वेक्षण कर सकते हैं । औसतन सवर्णो की संख्या चालीस प्रतिशत है। जिसमे हिन्दु और मुस्लिम सवर्ण शामिल हैं । पिछडे , दलित और पिछडे मुस्लिम करीब साठ प्रतिशत हैं । जनसंख्या का यह अन्तर चुनाव मे विगत सत्तर सालो से सिद्ध है। सवर्णों का रूझान काँग्रेस के साथ रहा तो काँग्रेस जीतती रही । भाजपा मे बढा तो भाजपा के दिन बहुरे। काँग्रेस तो मुस्लिम सवर्ण वोटरो के बदौलत ही सत्ता मे रही। सवर्णो के प्रभाव से पिछडे और दलित वोट भी साथ मे आये। पिछडी जातिवादी दल राजद और जदयू , बसपा अपने जातीय वोटो के साथ मुस्लिम और सवर्ण वोटो मे सेन्ध मारकर काँग्रेस के जमीन पर कब्जा करने मे सफल हुए। काँग्रेस ने बिहार मे अपनी जमीन गंवा दी और दीर्घकालिक गठबंधन से अपना वजूद समाप्त करके कुकुर कौरा के मुहताज हो गया। काँग्रेस की यह आत्मघाती कदम ने सवर्णों को काँग्रेस से दूर कर दिया।उसका मुस्लिम दलित वोट भी खिसक गया। सारे राजनीतिक दल मुस्लिम , पिछडे और...