जब सरस्वती प्रकट होती हैं तो ज्ञान , विद्या , कला, कविता, संगीत, और साहित्यिक विधायें प्रकट होने लगती हैं ।
सरस्वती कौन ? उनका स्वरूप । _________________________ आलेखक: प्रभाकर चौबे चिंतक विचारक । _________________________ ऊँ ऐं ऊँ।। सरस्वती का बीज मन्त्र है। त्रिवेणी मे गंगा यमुना दिखती हैं ।सरस्वती अदृष्य हैं । सभी देव ,देवी के साधको ने अपने अराध्य को प्रकट कर वार्ता भी की है। लेकिन सरस्वती स्त्री रूपा होते हुए भी निराकार और सगुण तथा ज्ञान, विज्ञान , कला और विद्याओ के रूप मे हैं । ध्यान मे सरस्वती को देखा जा सकता है । जितना ध्यान प्रगाढ होगा और सात्विकता बढेगी प्रकाश , तेज और आनन्द बढता जाएगा। साधक अपनी कल्पना शक्ति से उनको प्रकट करता है। और वह एक विन्दु तक पहुंच जाता है तो वहाँ सारा अन्धकार खत्म होने लगता है और विद्याऐं प्रकट होने लगती हैं। भक्त भी स्त्री जैसा कोमल स्वभाव का हो जाता है और कुछ छुपा नही पाता । सभी साधक छुपा जाते हैं ।।छुपायेंगे नहीं । माता सरस्वती का भाव कभी समझ मे नही आता । जब सरस्वती प्रकट होती हैं तो ज्ञान , विद्या , कला, कविता, संगीत, और साहित्यिक विधायें प्रकट होने लगती हैं । तब समझ लेना चाहिए की सर...