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विरोध तब समाप्त हो गया।जब भगवान काशी विश्वनाथ जी ने सभी धर्मग्रन्थों के नीचे रखे रामचरितमानस को सबसे ऊपर करके उसपर अपना हस्ताक्षर सत्यम शिवमसुन्दरम लिख दिया

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 रामनवमी पर विशेष। ________________  तुलसी के राम ************ राम के समकालीन आदि कवि महर्षि वाल्मिकी ने संस्कृत भाषा मे रामायण की रचना की। वह विद्वानों तक सीमित रहा लेकिन कथावाचकों ने फिर भी रामकथा को प्रचारित किया ।कहा जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ही तुलसीदास जी बनकर धरा पर जन्म लिये ।उन्होंने सरल भाषा मे रामचरितमानस की रचना की ।जो जन जन तक पहुंचा ।  ब्राह्मण विद्वान और प्रतिक्रियावादी होते हैं ।किसी भी बदलाव को बिना ईश्वरीय चमत्कार के स्वीकार नही करते।धर्मशास्त्रों की भाषा संस्कृत थी जिसे अन्य भाषा मे लिखे जाने का विरोध करने लगे।धर्म रक्षा के प्रति विशेष जिम्मेवारी के कारण ब्राह्मण बिना ईश्वरीय समर्थन के किसी नई चीज को स्वीकार नहीं करते। यह सनातन शुद्धता के लिए आवश्यक भी है जिससे उसमे मिलावट न हो सके। उनके लिए यह उचित भी है।लेकिन इस विरोध तब समाप्त हो गया।जब भगवान काशी विश्वनाथ जी ने सभी धर्मग्रन्थों के नीचे रखे रामचरितमानस को सबसे ऊपर करके उसपर अपना हस्ताक्षर सत्यम शिवमसुन्दरम लिख दिया।रामचरितमानस के दोहे चौपाई पढने पर सामवेद पढने का फल मिलता है।महर्षि वाल्मीकि ने...