ब्राह्मणवाद जातिवाद नहीं संस्कार संस्कृतिवाद है। ।
मैने उपेक्षित अनादृत ब्राह्मण वाद शब्द को उठाया है और हिन्दुत्व को इसमे समेटने की तैयारी मे हूँ । मैने स्पष्ट कर दिया है कि ब्राह्मण वाद संस्कार वाद संस्कृति वाद और शुद्ध सनातनधर्म वाद है।यह जातिवाद या मनुवाद नहीं लेकिन जातियों के कर्तव्य और अधिकारो की विवेचना करता है।संस्कार हीन अनुशासन रहित हिन्दुत्व बिखर जाएगा और म्लेच्छत्व को प्राप्त होगा।हम सनातन धर्म संस्कृति की रक्षा करने चले है न कि मानवता का खून करने।म्लेच्छ बन ही जायेंगे तो फिर हम किस सनातन संस्कारों के लिए लडेंगे ? बर्णसंकरित और कर्मसंकरित व्यवस्था से श्रेष्ठ है,संस्कारयुक्त कर्तव्य को धर्म मानने वाली जातीय व्यवस्था ।जातिबन्धन भी एक संस्कार ही है! ब्राह्मण बसुधैव कुटुंबकम एवं जीव ,प्रकृति के पोषण से कल्याण मे वृद्धि के सिद्धान्त को प्रतिपादित करता है।परोपकार पुण्याय पापाय परपीडनम इसका आदर्श वाक्य है।धर्म की रक्षा संस्कारोन्नयन एवं भक्ति से संभव है।ब्राह्मण के धर्मानुशासन मे हिन्दुओ को जुड़ने के सिवाय एकजुटता और कल्याण को कोई उपाय नहीं ।ब्राह्मण सबका गुरू, कल्याण चाहने वाला नारायण का अंश है।वही सनातन धर्...