पति की बुराई करना। पर मर्दो को देखकर मुस्कराना और खिल ऊठना और पति को देखते ही चेहरा ऊतर जाना ।फिर भी सती
सति और सति का ढोंग। ****************** विदेशो मे दो चार साल मे ही पति पत्नी की तलाक हो जाती है ।कारण दो साल मे ही दोनो पूरी तरह एक दुसरे को जान लेते हैं कि स्वार्थी है।जबकि भारत मे जीवन भर मे एक दुसरे को जान नही पाते इसलिए लंबा खिंचता है ।सात जनम मे भी नही जान पाते एक दुसरे के स्वार्थ को। भारत मे पत्नी पति की जीवन रेल की दो पटरियो की तरह है जिसमे ता जिन्दगी मिलन संभव नहीं बस रेल जब गुजरती है तो चक्के दोनो पटरियो से गुजरते हैं ।इसी को वैवाहिक संबंध कहते हैं ।यह अच्छा भी है। वर्ना लव मैरेज करने वाले तो पटरियो को सटाने के लिए कबारते हैं ।जब सट गई पटरियां तो वैवाहिक संबंध रूपी ट्रेन ऊलट जाती है।तलाक या कलह का अखाडा हो जाता है।ऋषि परंपराओ के अनुशरण करने पर तो ये दुरी और बढ जाती है।इससे स्वास्थ ठीक रहता है और समझने की शक्ति भी ।जीवन भक्ति मय हो जाता है ।वैवाहिक जीवन शिव और पार्वती के समान आनन्दमय सुखमय हो जाता है।पति यहाँ परमेश्वर हो जाता है और नारी देवी। दोनो जीवनमुक्ति का अनुभव करते हैं ।कर्तव्य को धर्म मानकर करने से दोनो एक दुसरे ...