युग का समाधान।
युग का समाधान। आलेखक :प्रभाकर चौबे। _____________________ ब्राह्मणवादी बनें यह जातिवाद को खुद मे समेटकर एक सूत्र मे बान्ध लेगा ।।अपने संस्कारो से जुडें। संक्रमण काल मे कुछ शक्तियाँ इसके खिलाफ हैं जो अज्ञान के कारण विरोधी बनकर इसके पहरूओ पर आक्रमणकारी हो रहे हैं । यह एक विचारक्रान्ति अभियान है। अभिनव सांस्कृतिक क्रान्ति का आगाज। बुराईयो मे आकर्षण बहुत होता है। मन्मथ स्वभाव का मन उधर ज्यादे जाता है। मन को रोककर ऋषि-मुनियों की विचारधारा की ओर ले चलें । हम इस पहलवानी मे पटकायेंगे भी ।अखाडे मे मजबूत पहलवान प्रतिद्वन्दी हैं ।जो सत्ता मे है ताकतवर भी हैं ।संगठित भी हैं । बस कम खायें गम खाये । आपस मे मिल बांटकर खाने की आदत डालें ।धन का अपने भाईयो के हित मे उपयोग कर अगर उनकी संकट हर लेंगे तो वह अक्षय दान कभी निष्फल नही जाएगा। जिसे देंगे उसका मुंह न देखे ।उसकी काबिलियत और संस्कार न देखें ।मदद को धर्म समझें । जिससे वह स्टेबुल हो जाय ।इससे निम्न कार्य करने की विवशता खत्म होगी और फिर सात्विक प्रवाह उत्पन्न होगा। जो गरीब हैकिन्तु धर्मनिष्ठ त्याग परोपकार की भावना मे स्थित...