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जनकपुर मे जहाँ सीता जी पली बढी वह जगह जनकपुर स्थान नही है।

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 जानकी नवमी पर विशेष!  जनकपुर मे जहाँ सीता जी पली बढी वह जगह जनकपुर स्थान नही है।मै ने वहाँ जाने पर अनुभव किया ।उस जगह पर एक रामजानकी मन्दिर बना है। जो  पुराने महल/ किला के पास है।  वहाँ दुधमती नदी बहती है।जानकी जी दुधमती नदी मे नहाती थी एवं वही दूध पीती थी।जनकपुर धाम के किनारे वह नदी आज भी बहती है।अब वह एक पतली कम चौडी नदी  के रूप मे है।  उसका कलर दूध जैसा ऊजला है।एक मौनी बाबा का आश्रम है ।आश्रम के निकट  उन्होंने साफ सफाई करके अच्छे घाट का निर्माण कराया है।वहाँ का जल स्वच्छ और दूध जैसा है।सीतामढी मे भी जानकी उत्पति स्थल पर मन्दिर बना है।शहर मे बने जानकी मन्दिर वाला जगह सीता उत्पत्ति की जगह नही लगा।वह नये मन्दिर वाला जगह ही लगा।जब राजा दशरथ की चतुरंगिनी सेना बारात के रूप मे अयोध्यावासियो के साथ चली तो राजा जनक आवभगत की चिन्ता मे पड गये की कैसे इतने बारातियों की  अच्छे ढंग से स्वागत हो पायेगा।तब माता जानकी जी ने अपने पिता जी को कहा कि सभी बारातियो को पोखरों के किनारे ठहरा दें।वहाँ पोखरों की बहुतायत थी।बाराती पोखरों के नजदीक ठहराये गये। जिसकी जो इच्...